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Article 88 In Hindi | Article 88 Of Indian Constitution In Hindi | अनुच्छेद 88 क्या है

इस पोस्ट मे आपको Article 88 Of Indian Constitution In Hindi मे बताया गया है। अगर आपको Article 88 In Hindi मे जानकारी नहीं है कि अनुच्छेद 88 क्या है, तो इस पोस्ट मे आपको इसकी पूरी जानकारी मिलेगी।

अनुच्छेद हमारे भारतीय संविधान मे दिए गए है, जिसने हर एक प्रावधान को एक अंक दिया गया है, जिसमे Article 88 भी एक है, तो चलिए जानते है इसके बारे में।

Article 88 In Hindi

Anuched 88 – सदनों के संबंध में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार
भारत के प्रत्येक मंत्री और महान्यायवादी को किसी भी सदन की कार्यवाही, सदनों की किसी भी संयुक्त बैठक और संसद की किसी भी समिति, जिसका वह सदस्य हो सकता है, में बोलने और अन्यथा भाग लेने का अधिकार होगा, लेकिन इस अनुच्छेद के आधार पर संसद के अधिकारियों को वोट देने का अधिकार नहीं होगा।

INDIAN  CONSTITUTION PART 5 ARTICLE

Article 88 Of Indian Constitution In Hindi & English

Article 88 – Rights of Ministers and Attorney General in respects Houses
Every Minister and the Attorney General of India shall have the right to speak in, and otherwise to take part in the proceedings of either House, any joint sitting of the Houses, and any committee of Parliament of which he may be named a member, but shall not by virtue of this article be entitled to vote Officers of Parliament.

नोट- इसमे कही सारी बाते भारतीय संविधान से ही ली गई है। यानी यह संविधान के शब्द है।.

Anuched 88 Kya Hai

वाद-विवाद संक्षेप – एक सदस्य ने इस प्रावधान के अंतर्गत अधिकारों को केवल संसद के निर्वाचित सदस्यों तक सीमित करने के लिए एक संशोधन पेश किया। उन्होंने तर्क दिया कि मंत्री पद की जिम्मेदारी के सिद्धांत के अनुसार केवल निर्वाचित सदस्यों को ही मंत्री बनाया जाना चाहिए।

निर्वाचित सांसदों को स्वाभाविक रूप से संसदीय कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने आगे कहा कि भागीदारी के अधिकार को मतदान के अधिकार से जोड़ा जाना चाहिए। ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष ने इस संशोधन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान आम तौर पर स्वीकृत नियम का अपवाद है, जिसमें केवल सदन के सदस्यों को ही सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जाती है। संसद के दोनों सदनों में विधायी कार्य होता था।

जब कोई विधेयक पेश किया गया तो वह हाउस ऑफ पीपल और काउंसिल ऑफ स्टेट्स दोनों के माध्यम से पारित हो गया। इस प्रावधान ने प्रभारी मंत्री, जिन्हें सदन का सदस्य होने की आवश्यकता नहीं है, को विधेयक पर बोलने और प्रश्नों का उत्तर देने में सुविधा प्रदान की।

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Final Words

तो आपको Article 88 Of Indian Constitution In Hindi की जानकारी कैसी लगी नीचे कमेंट करके जरूर बताएं। इसमे मैने Article 88 In Hindi & English दोनो भाषाओं मे बताया है यानी कि Anuched 88 Kya Hai? अगर इससे संबंधित कोई प्रश्न हो तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते है, बाकी पोस्ट को शेयर जरूर करें।

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